NEET मामले में एक और बड़ा खुलासा, साइबर ठग गिरोह से जुड़ा है केस

Prashant Kumar
By Prashant Kumar - Content Editor
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NEET पेपर लीक मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। अब इस केस में साइबर अपराधियों की अहम भूमिका सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस केस से जुड़े गिरोह ने नीट यूजी प्रश्न पत्र बाहर लाने के लिए साइबर अपराधियों की मदद ली थी। पेपर लीक मामले में देवघर से गिरफ्तार पंकु कारू और बिट्टू कुमार साइबर ठग गिरोह से जुड़े हैं।

ये लोग शेखपुरा, नालंदा और नवादा में अपना संगठित गिरोह चलाकर लोन एवं नौकरी सेटिंग करवाने आदि के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। इन्हीं तीनों ने पेपर लीक से जुड़े गिरोह को आश्रयस्थल, डुप्लीकेट सिम कार्ड और मोबाइल फोन उपलब्ध कराया था। पूछताछ में पता चला कि तीनों फर्जी सिम और फर्जी बैंक खाता का उपयोग कर साइबर ठगी की रकम भी मंगाते थे। पेपर लीक से जुड़े गिरोह को डुप्लीकेट सिम और मोबाइल फोन इसी गिरोह ने उपलब्ध कराया था।

पंकू और बिट्टू ने पूछताछ में ईओयू को बताया कि उन दोनों ने देवघर से फर्जी आइडी के आधार पर दो मोबाइल खरीदे थे, जिसमें फर्जी सिम लगाए थे। कारू के पास से दो अलग अलग कंपनियों का मोबाइल, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, एसबीआई का तीन एटीएम कार्ड, ब्लैंक चेक, 40 हजार नकद, कार, जियो कंपनी का दो खाली रैपर, जिसपर दो मोबाइल लिखा हुआ था, देवघर के बारमसिया चौक स्थित मोबाइल स्टोर से खरीदारी किए सामान, इंडियन बैंक का पासबुक, पंजाब नेशनल बैंक का पासबुक मिला।

दोनों पासबुक राजीव कुमार के नाम से था। साथ ही चार अलग अलग बैंकों के ब्लैंड चेक को बरामद किया गया। इसी तरह पंकु कुमार के पास से एक मोबाइल, एयरटेल कंपनी का सिम कार्ड, आईसीआईसीआई, इंडियन, एक्सीस, विजया, बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक का एटीएम कार्ड, पंकु के नाम से दो पैन कार्ड, एक पासपोर्ट औ चेक बुक मिला।

इसी तरह परमजीत उर्फ बिट़्टू कुमार के पास से एक मोबाइल, नकद, तीन बैंकों का एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, बिट्टू के नाम से दो आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राम रौशन का आधार कार्ड और चंदन कुमार के नाम से वोटर आइडी कार्ड मिला था।तीनों के पास से बरामद मोबाइल एक ही कंपनी के हैं। इनके पास से बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच की जा रही है। डुप्लीकेट सिम कार्ड से किस मोबाइल नंबर पर बात की गई थी?

बरामद मोबाइल से डिलीट किए गए नंबर, मैसेज को भी जांच एजेंसी रिकवर कर रही है। ताकि यह पता चला चल सके कि उस नंबर से कितने लोगों से संपर्क किया गया था और मैसेज कहां कहां भेजे गए थे। जरूरत पड़ी तो ईओयू इन तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है।

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