पटना के DM का ट्रांसफर, तत्कालीन डीएम चंद्रशेखर और केके पाठक के बीच होती थी टकरार

Prashant Kumar
By Prashant Kumar - Content Editor
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पटना के DM शीर्षत कपिल अशोक का ट्रांसफर कर दिया गया। आईएएस डॉ. चंद्रशेखर सिंह को फिर से पटना का डीएम बनाया गया है। शीर्षत कपिल अशोक को बिहार राज्य पथ विकास निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया हैं। अगले आदेश तक विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। इसके साथ ही तीन आईएएस अफसरों का भी तबादला किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे आईएएस निलेश रामचंद्र देवरे को नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही प्रबंध निदेशक बिहार अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण और बिहार राज्य संचरण कंपनी लिमिटेड के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। देवरे 2011 बैच के अधिकारी हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे हिमांशु शर्मा को जीविका का मुख्य कार्यपालक अधिकारी बनाया गया है। हिमांशु शर्मा 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक आदित्य प्रकाश को स्वास्थ्य विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। वे 2014 बैच के ऑफिसर हैं।

शीर्षत कपिल अशोक को 26 जनवरी को पटना का डीएम बनाया गया था। उन्होंने डॉ. चंद्रशेखर सिंह की जगह ली थी। कड़ाके की ठंड को देखते हुए डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने 23 जनवरी तक 8वीं तक के स्कूल बंद रखने का आदेश दिया था। इसी को लेकर केके पाठक की ओर से सवाल किए गए, जिसे लेकर तनातनी बढ़ गई। बाद में डॉ. चंद्रशेखर सिंह को मुख्यमंत्री सचिवालय में विशेष सचिव बनाया गया था।

बिहार शिक्षा विभाग में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव केके पाठक और तत्कालीन पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह के बीच लगातार तकरार रही थी। पिछली ठंड में कड़ाके की सर्दी के मद्देनजर पटना में स्कूलों की छुट्टी को लेकर शिक्षा विभाग ने पटना प्रशासन को एक लेटर भेजा गया था। इसमें सर्दी की वजह से स्कूल बंद किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे।

उस चिट्ठी के जवाब में पटना डीएम चंद्रशेखर सिंह ने करारा जवाब देते हुए पत्र लिखा था। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को ये पत्र लिखा। इस पत्र के जरिए पटना डीएम ने अपने अधिकार और कार्यक्षेत्र से वाकिफ कराया। उन्होंने कहा कि क्षेत्राधिकार से बाहर होने के कारण शिक्षा विभाग को इसका अधिकार नहीं है। क्षेत्राधिकार के तहत धारा 144 लगाने का अधिकार जिलाधिकारी को है।

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