बिहार का एक ऐसा मंदिर जहां मूर्तियों की नहीं समाधियों की होती है पूजा, तो एक ओर जलती है चिता, जानिए क्या है मान्यताएं

Prashant Kumar
By Prashant Kumar - Content Editor
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पटना: बिहार की राजधानी पटना से करीब 90 किलोमीटर समस्तीपुर जिले से 20 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित ध्रुवगामा गांव में माता सती की मूर्तियों की नहीं समाधि यों की पूजा की जाती है, जो सती माता के नाम से प्रसिद्ध है। जहां श्रद्धालुओं के आस्था का मुख द्वार है। लोग देवी स्वरूप इनकी पूजा करते हैं, लोग माता सती के दर्शन को लेकर समस्तीपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पटना, मुंबई, दिल्ली, नेपाल सहित देश विदेश से मता सती के दर्शन करने श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। समस्तीपुर जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर ध्रुवगामा गॉव स्थित माता सती की मंदिर अवस्थित है।

क्या है सती माता की कहानी

वर्ष 1430 ई० में अगहन शुक्ल सप्तमी मंगलवार को ध्रवगामा गांव में गति राम सिंह की मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी चंद्रवती देवी लोगो के मना करने के बाद भी खुद को श्रृंगार से सज सभी को आशीर्वाद देते वह अपने पति के साथ चिता पर बैठ गई और सती हो गई, बताया जाता है कि इनका एक पुत्र भी थे जो बौद्ध राम सिंह के नाम से जाने जाते थे। और यह गूंगे थे। माता के सती होने पर लोगों को परेशानियां होने लगी परंतु माता सती ने अपने गूंगे बेटे को वाक शक्ति प्रदान की जिसके बाद उनके पुत्र बौद्ध राम सिंह बोलने लगे।

आज भी यहां जलती है चिता

स्थानीय लोग बताते हैं कि माता सती ने यहां के लोगों को सती होते समय अपने वंश को इसी परिसर में दाह संस्कार करने की बात कही थी जिसके बाद से यहां पर उस वंश के व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसी परिसर में दाह संस्कार भी किया जाता है। आगे चलकर श्रद्धालुओं ने उसी परिसर में हनुमान, माता दुर्गा, काली, पार्वती, शिव की मंदिर का निर्माण कराया गया है। माता सती की महिमा आपार है, जिसको लेकर लोग दूर-दराज से यहां पूजा अर्चना करने आते हैं।

क्या है यहां के लोगों के लिए माता का वरदान

यहां के लोग बताते हैं कि इस गॉव के लिए माता सती का वरदान भी है। इस गॉव में जितनी भी लड़की शादी कर आएगी उसको हमेशा अपने परिवार में सुख और खुशी मिलेगा। नवरात्र, सावन सोमवारी व महाशिवरात्रि सहित अन्य अवसर पर यहांं भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस गांव में आज तक माता सती की महिमा से किसी भी प्रकार के आपदा विपत्ति नहीं आई है। यहां के लोग यह भी बताते हैं कि आज से वर्षों पहले गांव में बाहर के डकैत द्वारा गांव में डकैती के लिए आया था, डकैत गांव से डकैती कर माता सती के मंदिर के समीप से होते हुए वापस लौट रहा था। उसी दौरान सभी डकैत अंधा हो गया, जिसके बाद सुबह होते ही गांव वालों को इसकी जानकारी मिली, इसके बाद से आज तक इस गांव में डकैती जैसी घटनाएं नहीं होती है। वही वर्ष 1930 ई० में माता सती के सती होने के बाद से ही, इस गांव में किसी भी तरह की आपदा नहीं आता है। इस मंदिर में जो भी श्रद्धालु अपने मुराद लेकर आते हैं, माता सती उनकी मनोकामना सदेव पूर्ण होता है।

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