रामकृपाल यादव बोले- लालू प्रसाद ने कभी कांग्रेस के सामने आत्मसम्मान नहीं खोया था, तेजस्वी ने बिहार का सिर झुका दिया

HD News Desk
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रामकृपाल यादव ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधा।

जमुई में शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता रामकृपाल यादव ने विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता मुद्दा विहीन होकर केवल अराजकता फैलाने का काम कर रहे हैं।

रामकृपाल यादव ने कहा कि विपक्ष की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे पूरे देश की माताओं का अपमान बताते हुए कहा कि “बिहारवासी कभी इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

राजद को पिछलग्गू करार दिया

तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने “कांग्रेस का पिछलग्गू यादव” करार दिया। यादव ने कहा, “लालू प्रसाद यादव ने कभी कांग्रेस के सामने आत्मसम्मान नहीं खोया था, लेकिन उनके बेटे ने बिहार का सिर झुका दिया।”

उन्होंने कांग्रेस की उस सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कड़ा ऐतराज जताया, जिसमें लिखा गया था – “बी से बीड़ी, बी से बिहारी।” इसे बिहारवासियों का अपमान बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है और ऐसे लोग चुनावी फायदे के लिए बिहारी समाज को नीचा दिखाना चाहते हैं।

मोदी-नीतीश सरकार की योजनाओं का बखान

रामकृपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार और देश 2047 तक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में पहुंचने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने गिनाया कि शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना, मुद्रा लोन, जीविका दीदी से लखपति दीदी, हर घर नल से जल, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत कार्ड, 35 प्रतिशत आरक्षण और पेंशन वृद्धि जैसी योजनाएं महिलाओं और समाज के सशक्तिकरण की मिसाल हैं।

“200 से ज्यादा सीटें जीतेगा एनडीए”

भाजपा नेता ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में 200 से अधिक सीटें हासिल करेगा। उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए कहा कि “जब राज्य में विकास और कानून व्यवस्था बेहतर है तभी वे आधी रात को पटना की सड़कों पर रील बनाने का समय निकाल पाते हैं।”

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

रामकृपाल यादव ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे हमेशा भारत विरोधी ताकतों की भाषा बोलते हैं और देश की उपलब्धियों पर गर्व करने की बजाय विदेशी सुर में सुर मिलाते हैं।

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