अंजू देवी बनीं पटना जिला परिषद की अध्यक्ष, वोटिंग से पहले ही निकल गईं पूर्व चेयरमैन स्तुति कुमारी

Prashant Kumar
By Prashant Kumar - Content Editor
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पटना जिला परिषद की अध्यक्ष पद पर बुधवार को हुए चुनाव में अंजू देवी ने जीत दर्ज की है। अंजू को 33 वोट मिले जबकि उनकी विरोधी प्रत्याशी रेहाना परवीन को 5 वोट ही मिले। जिला परिषद की पूर्व चेयरमैन स्तुति कुमारी वोटिंग का बहिष्कार करके पहले ही बाहर निकल गईं। बता दें कि स्तुति को चंद महीने पहले अविश्वास प्रस्ताव लाकर पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से जिला परिषद के अध्यक्ष का पद खाली था। नई अध्यक्ष अंजू देवी का शपथग्रहण जल्द ही होगा। वे पहले भी जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं।

जानकारी के मुताबिक पटना समाहरणालय के ऑडिटोरियम हॉल में डीएम शीर्षत कपिल अशोक के निर्देशन में बुधवार सुबह 10.30 बजे से जिला परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। वोटिंग के लिए जिला परिषद सदस्यों के हॉल में प्रवेश का समय 11.30 बजे तक निर्धारित किया गया था। हालांकि, 3 सदस्य वोटिंग में नहीं पहुंचे, जिसके बाद मतदान शुरू हो गया। मसौढ़ी की जिला परिषद सदस्य सविता देवी निर्धारित समय से 6 मिनट की देरी पर समाहरणालय पहुंचीं, लेकिन उन्हें मतदान का मौका नहीं मिल पाया। उन्होंने बताया कि रास्ते में जाम लगने और गाड़ी पंक्चर हो जाने की वजह से वह लेट हो गईं।

जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष कुमारी स्तुति ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। वह मतदान के लिए समाहरणालय तो आई थीं, लेकिन वोटिंग शुरू होते ही बाहर निकल गईं। स्तुति ने आरोप लगाए कि गलत ढंग से अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया हुआ है। स्तुति के बाहर निकलने के बाद अंजू देवी का जीतना तय हो गया था।

बता दें कि इस साल की शुरुआत में पटना जिला परिष्द्ध के 44 में से 26 पार्षदों ने तत्कालीन अध्यक्ष स्तुति कुमारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। यह प्रस्ताव लाने वालों में उपाध्यक्ष आशा सिन्हा भी शामिल थीं। इस प्रस्ताव पर फरवरी में वोटिंग हुई, जिसमें 44 में से 22 सदस्यों ने ही हिस्सा लिया। सभी ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया और स्तुति कुमारी की कुर्सी चली गई थी। इसके बाद स्तुति ने अदालत की शरण ली। उनका दावा है कि जब तक निर्वाचित सदस्यों की आधी संख्या उनके खिलाफ वोट नहीं डालते, तब तक उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव वैध नहीं है। हालांकि, कोर्ट से अभी तक उन्हें राहत नहीं मिल पाई।

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